01/08/2024
"डाक्टर नासिर खान साहब" (एम बी बी एस एम डी)
ये कानपुर जाजमऊ कि वो अज़ीम शख्शियत है..जो किसी ताआर्रफ कि मोहताज नहीं है..! जिनके बारे में अगर कुछ बयां किया जाये तो लफ्ज़ कम पड़ जायें..!
ओर अगर इन्सानियत कि खिदमत कि बात कि जाए तो इनसे कोई सिखे कि खिदमते खल्क कैसे कि जाती है..!
डाक्टर नासिर खान साहब..!एम बी बी एस एम डी..!
इनका यह कोल हमेशा रहा है कि जुमे कि नमाज़ के बाद मस्जिद में हर जाती धर्म मज़हब को मानने वाले लोग इन्हें दिखाने आ जाते हैं..!ओर यह जनाब ख़ुशी ख़ुशी सबको बढ़ी संजीदगी से देख लेते है ओर दवाई लिख देते हैं..!
ओर जब तक आखरी मरीज़ नहीं देख लेते मस्जिद से निकलते नहीं..ओर फिस दैने लगो तो कहते हैं मस्जिद में कैसी फिस..!फिस हास्पिटल आइये तब दिजियेगा..!
नासिर हास्पिटल के नाम से इनका अस्पताल है..!ओर ओपिडि फिस सिर्फ तीस रुपए है..!
ओर अगर किसी पैशेन्ट का बिल 15000 रुपए है तो 5000 रुपए राजी खुशी खुश होकर रख लेते हैं..!
ओर वेवाओ ओर यतिमो से तो पैसे भी नहीं लेते..!
आज के माआशरे को इन जैसे होनाहर हिम्मत जज्बे ओर कोम ओर मुल्क कि खिदमत करने वालों कि जरूरत है..!जो अल्लाह पाक परवरदिगार कि मखलूक को कुछ समझें..!ओर उनकि खिदमत में ज़िन्दगी गुजर बसर करें..!
अल्लाह से दुआ है अल्लाह पाक इनके होंसले ओर हिम्मत कि हिफाजत करें इन्हें दिन दुनिया में मजीद तरक्की ओर कामयाबी अता फरमाए..!इनकि उम्र में खूब इजाफा करें..!आज के इस संगीन दोर को देखते हुए..इस तरह के इन्सानों का होना अपने आप में बहुत बड़ी बात है..! "इसलिए "
याद रखिए ऐसे ही लोग अहसास दिलाते हैं कि इन्सानियत आज भी जिंदा है..!जो आवाम कि खिदमत को आला दर्जे का मकाम दे..ओर उसको खिदमते खल्क समझें..! अल्लाह पाक इनकि उम्र में इजाफा दे मजीद तरक्की अता करें "आमीन '
मो नासिर अली मनिहार
स्वतंत्र पत्रकार लेखक