akhabaar

akhabaar अखबार एक सार्वजनिक पेज है जिसे समाचार प्रसारण के लिए बनाया गया है।
दिल्ली ब्रांच❤️

नेपाल प्रीमियर लीग खेलने पड़ोसी देश पहुंच चुके गब्बर का जोरदार स्वागत हुआ है। नेपाल प्रीमियर लीग 2024 का पहला सीजन 30 नव...
01/12/2024

नेपाल प्रीमियर लीग खेलने पड़ोसी देश पहुंच चुके गब्बर का जोरदार स्वागत हुआ है। नेपाल प्रीमियर लीग 2024 का पहला सीजन 30 नवंबर से 21 दिसंबर तक खेला जाएगा। शिखर धवन की टीम करनाली याक्स का पहला मुकाबला 2 दिसंबर को जनकपुर बोल्ट्स से होगा। उनकी टीम के कप्तान सोमपाल कामी हैं। नेपाल प्रीमियर लीग के पहले सीजन में कुल 8 टीमें हिस्सा लेंगी। गब्बर के स्वागत में नेपाल की जनता सड़कों पर उतर आई। शिखर धवन ने भारतीय टीम के लिए तीनों फॉर्मेट में इंटरनेशनल क्रिकेट खेला है। उन्होंने टीम के लिए 34 टेस्ट मैचों में 2315 रन, 167 वनडे मैचों में 6793 रन और 68 टी-20 इंटरनेशनल में 27.92 के औसत से 11 अर्धशतकीय पारियों के दम पर 1759 रन बनाए हैं। तीनों फॉर्मेट में उन्होंने कुल 24 शतक लगाए हैं। गब्बर को नए सफर के लिए शुभकामनाएं दीजिए। ♥️

_लेखनबाजी

शोएब अख्तर ने कहा कि, “यशस्वी जायसवाल के अंदर अद्भुत प्रतिभा है मिचेल स्टार्क के तेज गेंद पर जो उन्हें स्लेज करें और कह ...
01/12/2024

शोएब अख्तर ने कहा कि, “यशस्वी जायसवाल के अंदर अद्भुत प्रतिभा है मिचेल स्टार्क के तेज गेंद पर जो उन्हें स्लेज करें और कह दे कि आपकी गेंद बहुत स्लो आ रही है यह एक टीम इंडिया के भविष्य का अद्भुत आभूषण है” 🥰🥰🥰

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ICC और BCCI के सामने झुक गया है। उसने चैंपियंस ट्रॉफी का हाइब्रिड मॉडल स्वीकार कर लिया है। इसके ...
01/12/2024

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ICC और BCCI के सामने झुक गया है। उसने चैंपियंस ट्रॉफी का हाइब्रिड मॉडल स्वीकार कर लिया है। इसके तहत भारतीय टीम के सारे मैच, एक सेमीफाइनल और फाइनल पाकिस्तान के बाहर खेला जाएगा। हालांकि PCB ने चैंपियंस ट्रॉफी के लिए ज्यादा रिवेन्यू मांगा है। इसके साथ ही पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का कहना है कि साल 2031 तक भारत में जो भी ICC इवेंट होंगे, वे सभी हाइब्रिड मॉडल में होने चाहिए। इसका मतलब हुआ कि पाक टीम भी भारत में कोई टूर्नामेंट नहीं खेलेगी। ICC ने अभी इन शर्तों पर निर्णय नहीं लिया है। इतना तय है कि भारतीय टीम चैंपियंस ट्रॉफी खेलने पाकिस्तान नहीं जाएगी। यह खबर रीव स्पोर्ट्स के हवाले से आई है। इस पूरी खबर पर अपनी प्रतिक्रिया दीजिए।

_Lekhanbaji

चैंपियंस ट्रॉफी में मेजबानी को लेकर बीसीसीआई और पीसीबी में ठन गई है। बीसीसीआई ने पहले ही स्पष्ट कहा था कि टीम इंडिया सुर...
30/11/2024

चैंपियंस ट्रॉफी में मेजबानी को लेकर बीसीसीआई और पीसीबी में ठन गई है। बीसीसीआई ने पहले ही स्पष्ट कहा था कि टीम इंडिया सुरक्षा कारणों ने चैंपियंस ट्रॉफी के लिए पाकिस्तान का दौरा नहीं करेगी वहीं अब भारत के विदेश मंत्रालय ने भी दो टूक कह दिया है कि भारत, पाकिस्तान का दौरा नहीं करेगा।

भारत की मांग है कि पाकिस्तान हाइब्रिड मॉडल पर टूर्नामेंट का आयोजन कराए जिसमें भारत के मुकाबले, पाकिस्तान से बाहर किसी अन्य मुल्क में हों जबकि पाकिस्तान इसके लिए तैयार नहीं है।जल्द ही आईसीसी की बोर्ड मीटिंग में इस मसले पर फैसला लिया जाना है।

गौरतलब है 26/11 की घटना और फिर श्रीलंकाई टीम पर पाकिस्तान में आतंकी हमले के बाद भारत अपने खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है. जाहिर है कि किसी भी कीमत पर टीम इंडिया पाकिस्तान का दौरा नहीं करेगी। पाकिस्तान हाइब्रिड मॉडल पर सहमत नहीं है।तो क्या पाकिस्तान से चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी छिन जाएगी या भारत पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।दूसरे विकल्प की संभावना कम दिखती है क्योंकि इस समय बीसीसीआई दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है। आईसीसी को इससे राजस्व मिलता है और पीसीबी को आईसीसी से आर्थिक सहायता मिलती है। देखिए क्या होता है? मसला जो भी इसमें नुकसान क्रिकेट का है।

_सूरज ठाकुर

सोचिए, अगर आप तीसरी कक्षा के बाद स्कूल छोड़ दें, लेकिन आपकी कविताएँ पाँच विद्वानों के पीएचडी शोध का विषय बन जाएं! हलधर न...
29/11/2024

सोचिए, अगर आप तीसरी कक्षा के बाद स्कूल छोड़ दें, लेकिन आपकी कविताएँ पाँच विद्वानों के पीएचडी शोध का विषय बन जाएं! हलधर नाग, जिन्हें 'लोक कवि रत्न' कहा जाता है, ने कोसली भाषा में कविताएँ लिखकर साहित्य की दुनिया में इतिहास रच दिया। उनके पास किताबें नहीं, लेकिन उनकी कविताओं में छिपा ज्ञान किसी ग्रंथ से कम नहीं।
हलधर नाग की पहली कविता 1990 में प्रकाशित हुई, और तब से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। समाज, प्रकृति, और पौराणिक कथाओं पर लिखने वाले इस अद्भुत कवि ने कोसली भाषा को नई ऊंचाई दी। उनकी कविताएँ न सिर्फ जनता के दिलों को छूती हैं, बल्कि उन्हें साहित्य का एक अनमोल खजाना बना चुकी हैं। उनकी रचनाएँ इतनी प्रभावशाली हैं कि उन्हें 2016 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

उनके शब्दों में, "हर कोई कवि है, पर उसे आकार देना कला है।" यह वाक्य उनकी सरलता और गहराई को बखूबी दर्शाता है। बिना किताबों की मदद के, हलधर नाग ने अपनी कविताओं से समाज को जोड़ने और प्रेरित करने का जो काम किया, वह हर किसी के लिए प्रेरणा है। हलधर नाग की कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा ज्ञान किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन और अनुभवों से आता है।

पाकिस्तान में कजिन मैरिज (चचेरे, ममेरे भाई-बहनों के बीच होने वाली शादियों) के बढ़ने से कई तरह की बीमारियां पैदा हो रही ह...
29/11/2024

पाकिस्तान में कजिन मैरिज (चचेरे, ममेरे भाई-बहनों के बीच होने वाली शादियों) के बढ़ने से कई तरह की बीमारियां पैदा हो रही हैं। एक्सपर्ट ने इस पर चिंता जताते हुए कहा है कि कजिन मैरिज बढ़ने से आनुवंशिक विकारों में तेजी आई है। कराची की डोव यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस (DUHS) में जीनोमिक डिसऑर्डर एंड रिसेसिव डिसऑर्डर पर बात करते हुए विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में कजिन मैरिज की बढ़ती दर पर फिक्र का इजहार किया है।
जियो टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर स्टाइलियानोस एंटोनाराकिस ने बताया कि आनुवंशिक परिवर्तनशीलता (जेनेटिक वेरिएबिलिटी) विकास को बढ़ा सकती है लेकिन इसका एक बड़ा खतरा ये है कि ये आनुवंशिक विकारों (जेनेटिक डिसॉर्डर) का बोझ भी डालती है। यह बोझ विशेष रूप से उन आबादियों में ज्यादा होता है, जहां कजिन मैरिज की दर अधिक है।

पाकिस्तान में बढ़ता जा रहा कजिन मैरिज का चलन
पाकिस्तान में कुल होने वाली शादियों में से करीब 65 प्रतिशत कजिन मैरिज होती हैं। देश के कुछ समुदायों में कजिन मैरिज की दर 85 फीसदी तक है। DUHS के वाइस चांसलर प्रोफेसर सईद कुरैशी ने कहा कि सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक कारणों से कजिन मैरिज का चलन बढ़ा है। उन्होंने कहा, 'हालांकि इसके कुछ जैविक लाभ हैं लेकिन ये बच्चों में रिसेसिव और डोमिनेंट जेनेटिक विकारों का जोखिम काफी बढ़ा देता है।'

Brothers 🇵🇰🇧🇩 for a reason 🔥
29/11/2024

Brothers 🇵🇰🇧🇩 for a reason 🔥

इस जीत की इतना चर्चा क्यों?भारत को पर्थ टेस्ट जीते 36 घंटे से ज़्यादा हो चुके हैं, मगर इंडियन फैंस की एक्साइटमेंट कम होन...
29/11/2024

इस जीत की इतना चर्चा क्यों?

भारत को पर्थ टेस्ट जीते 36 घंटे से ज़्यादा हो चुके हैं, मगर इंडियन फैंस की एक्साइटमेंट कम होने का नाम नहीं ले रही। ज़्यादातर क्रिकेट एक्सपर्ट्स इसे भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे शानदार जीत बता रहे हैं। पर सवाल ये है कि पिछले टूर में जब भारत ने 330 रन चेज़ करते हुए गाबा टेस्ट जीता था, तो इस बार की जीत उससे खास कैसे हो गई? 2018-2021 के दौरे पर भी तो भारत ने ऑस्ट्रेलिया को दो-दो बार हराया था। तो इस बार की जीत में ऐसा क्या खास है कि इसकी चर्चा और उत्तेजना कम होने का नाम नहीं ले रही?

मुझसे पूछें, तो इसकी एक से ज़्यादा वजह मुझे दिखाई देती हैं। 2018-19 के दौरे पर ऑस्ट्रेलिया की टीम में स्टीव स्मिथ और वॉर्नर जैसे धुरंधर सैंडपेपर स्कैंडल के बैन के चलते नहीं खेल रहे थे। 2021 के दौरे में जब भारत की C टीम ने ऑस्ट्रेलिया को हराया, तो एक तरह से उनके लिए झटका था... तब सब कुछ इतनी जल्दी हुआ कि उन्हें कुछ समझ ही नहीं आया। मगर इस बार के दौरे से पहले ऑस्ट्रेलिया पूरी तरह तैयार था। मैंने इतने सालों में ऑस्ट्रेलियन मीडिया में किसी एक दौरे को लेकर इतनी चर्चा नहीं सुनी। ऑस्ट्रेलियन अखबारों में टूर को लेकर हिंदी में हेडलाइन्स दी जा रही थीं। फॉक्स क्रिकेट जैसे हिंदी में कॉमेंट्री की तैयारी कर रहे थे। ऑस्ट्रेलिया के तमाम दिग्गज 3-1 और 4-1 से भारत की भविष्यवाणी करके अपना माइंड गेम खेल रहे थे।

और सबसे ऊपर, ऑस्ट्रेलियन बोर्ड ने भी इस दौरे में जिस तरह से वेन्यू रखे थे, उसी से समझ आ रहा था कि वो किसी भी कीमत पर भारत को हराने के लिए तैयार हैं।उन्होंने पहला मैच पर्थ के Optus Stadium में रखा, जहाँ अब तक हुए चारों मैचों में ऑस्ट्रेलिया बहुत आराम से जीत चुका था। वैसे भी वाका का ग्राउंड हो या Optus, पर्थ की मिट्टी ऐसी है कि ये जगह तेज़ पिचों के लिए जानी जाती है। पहला मैच पर्थ में करवाने के पीछे सोच यही थी कि भारत को पहले टेस्ट में इतनी करारी हार दी जाए कि उसका सारा कॉन्फिडेंस आते ही टूट जाए। दूसरा डे-नाइट टेस्ट पिंक बॉल के साथ एडिलेड में रखा गया। ऑस्ट्रेलिया अपने देश में आज तक एक भी पिंक बॉल टेस्ट नहीं हारा है। पिंक बॉल के सामने बल्लेबाज़ी करना वैसे भी बहुत मुश्किल होता है। तीसरा टेस्ट ब्रिसबेन में रखा गया है। जिसकी पिच हाल-फिलहाल पर्थ से भी तेज़ साबित हुई है। और आखिर के दोनों टेस्ट मेलबर्न और सिडनी में रखे गए, जहाँ पिच थोड़ी बैटिंग के माकूल होती है। लेकिन उन्होंने टूर ऐसे ही बनाया कि पहले तीन मैच में ही भारत को तबाह कर दिया जाए।ऊपर से पहले मैच से रोहित और शुभमन गायब थे। शमी भी टीम में नहीं थे। ऑस्ट्रेलियन्स को लग रहा था कि बस मैच जीतना औपचारिकता भर है। भारतीय टीम जब पहले खेलते हुए 150 पर ऑल आउट हुई, तो उन्हें लगा सब कुछ प्लान के मुताबिक चल रहा है। मगर इसके बाद अगले ढाई दिन में जो बाज़ी पलटी, उसकी किसी ऑस्ट्रेलियन ने कल्पना भी नहीं की थी।

पिछले कुछ सालों में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को कई बार हराया था, मगर इस मैच में भारत की दूसरी पारी शुरू होने के साथ-साथ जिस तरह भारत की लीड बढ़ती गई... ऑस्ट्रेलियन एक-एक विकेट को तरसते रहे... लीड 200, 300, 400 पार होती रही... तमाम पैंतरे आज़माने के बाद भी वो कुछ नहीं कर पाए... पर्थ की 35 डिग्री की गर्मी में उनका शरीर भी टूट रहा था और उनकी अकड़ भी... मैंने इतने सालों में ऑस्ट्रेलियन टीम को इतना असहाय, इतना मजबूर, इतना बेचारा कभी नहीं देखा... एक वक्त बाद वो भारतीय टीम के रहमो करम पर आ गए थे... उन्होंने हिम्मत छोड़ दी थी... आखिर में नीतीश कुमार रेड्डी और कोहली उनको मैदान के एक-एक कोने में मार रहे थे, मगर वो कुछ नहीं कर पाए... पर्थ के जिस मैदान पर वो भारत को मसल देना चाहते थे, उसी मैदान में पूरी ऑस्ट्रेलियन टीम को उल्टा लटका कर उनकी बेंत से पिटाई की जा रही थी... वो चिल्ला रहे थे मगर मन ही मन... जैसे हिंदी फिल्मों में होता है, माफिया को अगर किसी को सबक सिखाना होता है तो वो उसकी जान नहीं लेता बल्कि उसके हाथ-पाँव काटकर उसे छोड़ देता है, ताकि वो न जी सके, न मर सके... एक वक्त के बाद भारत की तरफ से बनाया गया एक-एक रन ऑस्ट्रेलिया को वैसे ही स्लो डेथ दे रहा था।

आज लोगों में जो आप खुशी देख रहे हैं, ये ऑस्ट्रेलियाई टीम को तड़पा-तड़पा कर मारने की ही है... ऑस्ट्रेलिया क्या, शायद ही किसी को याद होगा कि किसी एक मैच में ऑस्ट्रेलियाई टीम इतनी मजबूर लगी... सारी ज़िंदगी उन्होंने लोगों को मजबूर ही किया है, मगर इस मैच में वो जैसी दहाड़ के साथ आए थे और मैच खत्म होते-होते जिस तरह मिमियाने लगे और बाद में मिमियाते-मिमियाते जैसे वो शांत हो गए... उनके शांत हो जाने के इस सुख को वही आदमी समझ सकता है जिसने 90 के दौर में भारत को ऑस्ट्रेलिया में खेलते देखा है... ऑस्ट्रेलियन इतनी जल्दी हार मानने वाले नहीं हैं... वो पलट कर आएंगे... वो इस वक्त इतने बौखलाए हुए हैं, इतने फ्रस्ट्रेटेड हैं जैसे शायद कभी नहीं हुए। मगर हमें इस इंडियन टीम पर भी भरोसा है... ये इंडियन टीम काउंटर पंच देना जानती है... जो तेज़ पिचें और तेज़ गेंदबाज़ भारत के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा हथियार हुआ करते थे, वो खुद आज उनके जी का जंजाल बन गए हैं... भारत को डराने के लिए बाकी मैचों में पिच पर और घास छोड़ी, तो स्टार्क और हेज़लवुड से ज़्यादा बुमराह उसका फायदा उठाएंगे... यशस्वी और कोहली तो फिर भी इनके तेज़ गेंदबाज़ों को खेल लेंगे, मगर बुमराह के साथ शमी भी दूसरे मैच में वापिस आ गए, तो ये बेचारे कहाँ जाकर अपनी जान बचाएंगे, इन्हें खुद नहीं पता... ये चूहे-बिल्ली का खेल अभी डेढ़ महीना और चलने वाला है।लेकिन यकीन मानिए दोस्तों, अगर भारत ने 6 दिसंबर से होने वाला पिंक टेस्ट भी जीत लिया, तो ऑस्ट्रेलिया का गुरूर जिस गड्ढे में जाएगा और उनकी जो हालत होगी... उसका हम सिर्फ अंदाज़ा ही लगा सकते हैं... तब तक इस जीत का मज़ा लीजिए और इंतज़ार कीजिए 6 दिसंबर का।

(Neeraj Badhwar)

Sachin❤️
29/11/2024

Sachin❤️

Address

Mandi House

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when akhabaar posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share