29/06/2024
#सच्ची_घटना 🎯
बेल्ट खोल दे रामचंदर
नही साहब, मैं नही खोल सकता
खोल दे, बहुत दर्द हो रहा है
रामचंदर कैसे खोलता,vथोड़ी देर पहले जब हाथ लगाकर
देखा था तो समझ गया था कि अंतड़ियां खुल गयी हैं
बेल्ट ने दबा रखा है
उसने बेल्ट खोल दी तो
साहब बेहोशी के दौरे में चले जाते, फिर सचेत होते
फिर एक बार बुदबुदाये
अच्छा, एक बात मानेगा मेरी
- हां साहब
- तू बटालियन चला जा और कहना कि पूरी पलटन
शहीद हो गयी लेकिन कोई पीछे नही हटा
- आपको छोड़कर नही जाऊंगा साहब
पर साहब फिर बेहोश हो चुके थे
अब जेसीओ रामचन्दर यादव ने उन्हें उठाया और पहाड़ी
के नीचे लाने लगा ⛰️ रास्ते मे उसे अहसास हुआ कि
मेजर शैतान सिंह दम तोड़ चुके थे
बर्फ अब भी गिर रही थी 🏔️
राम चन्दर वहां पहुँचा जहां बटालियन का कैम्प था
पर वहाँ बहुत थोड़े लोग थे, जीप में बिठाकर उसे
हेडक्वार्टर लाया गया 🚔 उसने कहानी बताई
बारामूला से उन्हें 2 दिन पहले ही चुशुल सेक्टर में भेजा
गया था, वहां LAC के पास रेजांग ला पर एक मोर्चा
लगाया गया था, कम्पनी वहीं डटी हुई थी
18 नवम्बर की भयंकर सर्दी थी लेकिन भारतीय सैनिक
चौकस थे, रात साढ़े तीन बजे कुछ चीनियों को आते
देखा गया, मेजर साहब ने रेंज में आते ही उन पर फायर
करने का आदेश दिया
पहला रेला आते ही एक टुकड़ी ने धुआंधार फायरिंग हुई
चीनी गिरने लगे, वे चींटियों की तरह चढ़े आ रहे थे और
मरते जा रहे थे, तीन घण्टे तक लड़ाई चली फिर थम गई
सुबह साढ़े छह बजे, रोशनी होते ही बंकरों पर गोले 💣
बरसने लगे मानो बरसात हो रही हो हर पोस्ट, हर बंकर
फटने लगी, आधे घण्टे की शेलिंग के बाद नजारा बदल
चुका था
धुआं छंटते ही चीनी फिर आने लगे, हमारी कई पोस्ट
खामोश हो चुकी थी, जो बचे थे, गोलियां दाग रहे थे
मेजर शैतान सिंह को भी शेल का टुकड़ा लगा था
मगर वे पोस्ट से पोस्ट भागते रहे, जवानों का हौसला
बढ़ाते, इसी दौरान गोलियों का एक बर्स्ट लगा और
गिर गए, राम चन्दर उन्हें उठाकर ओट में ले आया
खून तेजी से बह रहा था, साहब बेहोश हो गए
फिर होश में आये तो जानकारी ली, फिर कहा
-बेल्ट खोल दे रामचंदर
बर्फबारी कुछ दिन बाद रुकी, सीजफायर हो चुका था
मगर बर्फ की मोटी तह हो चुकी थी, सारे निशान मिट
चुके थे
पूरे तीन माह के बाद बाद जब बर्फ पिघली 🏔️ तो इनकी
तलाश शुरू हुई, एक चरवाहे को पहाड़ी पर लाशों के ढेर
दिखा
हैवी शेलिंग से उड़े हुए हाथ पैर, हाथों में अब भी बंदूक
कोई यूँ पड़ा है जैसे अभी उठ कर गोली चलाने लगेगा
गुड्डे गुड़ियों की तरह जहां तहां बिखरे शरीर
कुमाऊं रेजिमेंट ने अपने 113 सैनिकों की लाशें इकट्ठा
की, 18 नवंबर 1962 की उस काल रात्रि में चीनी सेना
ने भी अपने 1200 से ज्यादा सैनिक खोए
बाद में आई रिपोर्ट्स बताती है कि चीन को सबसे ज्यादा
नुकसान रेजांग ला में हुआ था
उस रात, चीनियों नें आसपास की कई पहाड़ियों को बिना
लड़े कब्जा किया था, भारतीय सेना के कम जवान होने
के कारण उन्हें पीछे हटकर रिग्रूप होने को कहा गया था
यह आदेश, रेजांगला में मेजर शैतान सिंह भाटी को भी
मिले थे, मगर उनकी कम्पनी में अपने रिस्क पर, पोस्ट न
छोड़ना तय किया था
नतीजा शहादत होगा, वे जानते थे
#मेजर #शैतान_सिंह को परमवीर चक्र 🎖मिला
रेजांगला में उस पहाड़ी पर एक स्मारक बनाया गया
जहां कुमाऊं रेजिमेंट के 113 वीर अपनी जान दे गए
स्मारक 60 सालों तक चीन की और देखकर फुसफुसाता
था, यहां न किसी को घुसने दिया गया न आने दिया गया
60 साल बाद वह इलाका "बफर जोन" हो गया
और स्मारक तोड़ दिया गया..................💤