19/06/2026
बाबा काल भैरव जी के उज्जैन वाले मंदिर कि प्रमुख विशेषताएं क्या है ?
उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित भगवान काल भैरव का मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक मान्यताओं और चमत्कारों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर लगभग 6 हजार वर्ष पुराना माना जाता है।
इस पावन मंदिर की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
# # 1. मदिरा (शराब) का अद्भुत भोग
* मुख्य आकर्षण: इस मंदिर की सबसे बड़ी और हैरान करने वाली विशेषता यह है कि यहाँ भगवान काल भैरव को मदिरा का भोग लगाया जाता है।
* रहस्यमयी घटना: जब पुजारी मदिरा से भरे पात्र को बाबा के मुख से लगाते हैं, तो वह मदिरा देखते ही देखते गायब हो जाती है।
* अटूट आस्था: मूर्ति में मदिरा कहाँ जाती है, यह रहस्य आज भी बरकरार है और वैज्ञानिकों के लिए भी एक पहेली बना हुआ है।
# # 2. उज्जैन नगरी के "नगर कोतवाल" या सेनापति
* दिव्य रक्षक: बाबा काल भैरव को उज्जैन नगरी का रक्षक, कोतवाल या सेनापति माना जाता है।
* दर्शन की मान्यता: ऐसी मान्यता है कि बाबा महाकाल की नगरी की रक्षा काल भैरव ही करते हैं। महाकाल के दर्शन से पहले या बाद में यहाँ आकर हाजिरी लगाना अनिवार्य माना जाता है।
# # 3. सिंधिया राजवंश की विशेष पगड़ी
* ऐतिहासिक संबंध: मराठा काल में युद्ध में विजय की मन्नत पूरी होने पर मराठा शासक महादजी सिंधिया ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था।
* शाही परंपरा: तब से लेकर आज तक बाबा काल भैरव के शीश पर सिंधिया राजवंश की ओर से विशेष मराठा पगड़ी (पगड़ी) पहनाई जाती है।
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# # 4. तांत्रिक और अघोर संप्रदाय का प्रमुख केंद्र
* साधना स्थल: प्राचीन काल में यह मंदिर कपालिक और अघोरा संप्रदाय का एक बहुत बड़ा और प्रमुख केंद्र था।
* अष्ट भैरव प्रमुख: भगवान काल भैरव को तंत्र साधना के आठ भैरवों (अष्ट भैरव) में सर्वप्रमुख माना जाता है।
# # 5. मालवा शैली की वास्तुकला
* भव्य संरचना: मंदिर का निर्माण पारंपरिक उत्तर भारतीय शैली में ऊंचे शिखर के साथ किया गया है।
* प्राचीन कला: मंदिर की दीवारों पर कभी मालवा शैली के बेहद सुंदर चित्र और नक्काशी हुआ करती थी, जिनके अवशेष आज भी यहाँ देखे जा सकते हैं।
यदि आप उज्जैन की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो मुझे बताएं कि क्या आप दर्शन के समय, VIP पास की व्यवस्था या नजदीकी रुकने की जगहों के बारे में जानना चाहते हैं?